गोलू और अमन की कहानी 



रुद्रपुर नामक गांव में गोलू नाम का एक बड़ा लड़का रहता था,वह गांव के सरपंच का बेटा था।  उसे फैशन  से रहने का शौक था,वह हमेशा नए फैशन के बारे में सोचता था और नए फैशन के ही कपड़े पहना करता था।

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 एक बार उसे ख्याल आया कि अगर मैं बबलगम खाऊंगा तो और भी मॉडर्न  दिखूंगा।
अब  वह हमेशा बबलगम खाने लगा और धीरे धीरे उस लत लग गई वह दिन भर चबाता रहता था और बुलबुले फूलता था और बुलबुला फटने की आवाज़ पर खुश होता था। खाने के समय के अलावा हमेशा उसके मुंह में बबलगम रहता था।

 वह रास्ते में बबलगम थूक देता था जिससे वह बबलगम लोगों के चप्पलों  पर चिपक जाता था लोग इस बात से परेशान होने लगे थे ।

गांव के मोची के पास जो भी चप्पल या जूता रिपेयर के लिए आता था उसके नीचे बबलगम चिपका रहता था ।

वह जब भी सिनेमा हॉल में जाता था फिल्म खत्म होने के बाद वह बबलगम को सीट पर चिपका रहता था और  जब कोई उस सीट पर बैठता था वह बबलगम उस पर चिपक जाता था ।

लोग उससे परेशान हो चुके थे लेकिन कुछ के भी नहीं सकते थे क्यूंकि वह सरपंच का बेटा था।
 बार अमन नाम के एक छोटे लड़के ने उसे बबलगम थूकते हुए देखा ।

अमन ने उसे कहा कि तुम यहां बबलगम मत थूको लोगो को परेशानी होती है।
 इस पर गोलू भड़क गया और बोला - "जा रेे टिंगु!  मुझे मत सिखा , मैं अच्छे से जानता हूं मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं।"

अमन को इस पर बहुत गुस्सा आया और वह घर चला गया । अगली सुबह अमन अपने पापा के साथ बाइक से जाने के लिए तैयार हुआ और बाइक पर बैठा ,उसके पापा ने बाइक पर रखा हेलमेट उठाया और हेलमेट पहनकर बाइक स्टार्ट की और चल दिया।

जब वह सब्जी की दुकान के पास पहुंचे और हेलमेट उतारने लगे तो हेलमेट उनके बालो से चिपक गया ,वहां मौजूद कुछ लोगो ने उसकी मदद करने के लिए एक नाई को बुलाया और नाई ने अमन के पापा के बाल पीछे से काटकर हेलमेट निकाल दिया।

अमन ने हेलमेट को देखा तो पता चला कि हेलमेट के किनारे पर बबलगम चिपका हुआ था । अमन समझ गया कि ये हरकत गोलू ने उसको मजा चखाने के लिए की है।

अमन को उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था , वह ये सोचने लगा कि "अब मैं इसको कैसे सबक  सिखा पाऊंगा?"
ये सोचते सोचते वह अपने सबसे अच्छे दोस्त सुरेश के पास गया और उसने कहा -"अरे यार! इस गोलू ने परेशान करके रखा हुआ है , ये हमेशा बबलगम चिपका देता है। इसका कुछ इलाज करना ही पड़ेगा कुछ सोच!"
सुरेश ने कुछ देर सोचा और फिर उसे कुछ idea 
आया और उसने अमन से कहा -"मेरे पास एक idea 
है जिससे हम गोलू को मज़ा चखा सकते हैं।"
सुरेश बोला -"हम एक बबलगम को फेविकोल से भर देंगे और उसे गोलू को खिला देंगे तब उसको परेशानी का पता चलेगा ।"
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अगली सुबह वो दोनो उस जगह पर गए जहां पर गोलू बैठा रहता था वहां पर जाकर  सुरेश अमन को वह फेविकोल वाला बबलगम दिखाकर बोला -"देखो अमन! यह बबलगम मेरे चाचा अमेरिका से लेकर आए हैं , यह स्पेशल फ्लेवर वाला बबलगम है ।"
उसने वह बबलगम अमन के हाथ में दिया । गोलू यह सब देख रहा था , उसे वह बबलगम चाहिए था ।
वह अमन के पास जाकर बोला -"देखो ये बबलगम मुझको दे दो वरना मैं तुमसे छीन भी सकता हूं।"
अमन बोला -" अरे सुरेश! ये बबलगम तू इस मोटू को ही दे दे , वैसे भी स्कूल जाने का समय हो रहा है और मास्टर जी ने अगर मुझे बबलगम खाते हुए पकड़ लिया तो बहुत मार पड़ेगी।"
इतना कहकर वह चले गया ।
गोलू ने सुरेश से लिया बबलगम खोला और अपने मुंह में रखा बबलगम थूककर नया बबलगम खाया और चबाने लगा 2 मिनट बाद उसका मुंह चिपकने लगा और वह उसे चबा नहीं पा रहा था , उसने जब उसका बुलबुला बनाना चाहा तो उसके बहुत जोर से फूक़ मारने पर वह फेविकोल वाला बबलगम फूलने लगा 
और वह इतना बड़ा हो गया कि वह उड़ने लगा और गोलू भी आसमान में उड़ने लगा ।
अब गोलू पूरे गांव के ऊपर से उड़ रहा था और पूरे गांव वाले उस पर हंसने लगे । गोलू को अपनी गलती का एहसास हो गया । उसने किसी तरह एक पेड़ की टहनी को कसकर पकड़ लिया और बबलगम थूकने की कोशिश की , फिर कुछ लोगो ने आकर उसकी मदद करके उसको बचा लिया।

moral of the story :-


हमें दूसरों को परेशान नहीं करना चाहिए।

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