अकबर बीरबल की कहानियां -2

बादशाह अकबर के दरबार में एक बार एक आदमी दूसरे शहर से आया वह एक पंडित था और बुद्धिमान भी।

बादशाह अकबर ने उसका स्वागत किया और उसके आने का कारण पूछा तो उसने बताया कि वह अकबर के दरबार में उपस्थित सभी बुद्धिमान लोगों को चुनौती देना चाहता है।

Akbar Birbal Stories in Hindi
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अकबर खुश हुआ क्योंकि उसे अपने दरबारियों की परीक्षा लेना अच्छा लगता था ,इसलिए अकबर ने उसे अनुमति दे दी।

दरबारी थोड़ा डर गए क्योंकि सबसे बुद्धिमान व्यक्ति यानी बीरबल अभी तक दरबार में नहीं आए थे। फिर भी बादशाह की शान रखने के लिए उन्होंने चुनौती स्वीकार कर ली।

उस पंडित ने कहा मैं आप सबसे कुछ प्रश्न पूछूंगा और जो व्यक्ति सारे प्रश्नों के उत्तर दे देगा वही सबसे बुद्धिमान माना जाएगा।

दरबारी उत्साहित थे और डरे हुए भी थे।

पंडित ने पहला प्रश्न पूछा - सबसे तेज गति किसकी होती है?
दरबारियों ने उत्तर दिया - मन की गति।

अकबर खुश हुआ और दरबारियों को लगा कि यह सारे प्रश्न इसी प्रकार के पूछेगा जिनके उत्तर उन्हें पता हैं।

पंडित ने दूसरा प्रश्न पूछा - वह कौन है जो अंधेरे में साथ छोड़ देता है ?
प्रश्न थोड़ा जटिल था लेकिन दरबारियों ने कुछ देर तक सोचने के बाद उत्तर दिया - "व्यक्ति की परछाई।"

अब तक बीरबल भी आ चुके थे और अब वह भी प्रतियोगिता में शामिल हो गए थे।

अब पण्डित ने पूछा कि इस पूरी दुनिया की कुल आबादी कितनी है?
बीरबल बोले - जितने बाल जहांपनाह के सिर और दाढ़ी के कुल मिलाकर हैं ठीक इतने ही लोग दुनिया में हैं।

फिर प्रश्न आया - पूरे ब्रह्मांड में कितने ग्रह और नक्षत्र (तारे ) हैं ?
बीरबल चतुर थे इसलिए बोल पड़े - 100 किलो गेहूं में जितने दाने होते हैं उतने ही तारे और ग्रह पूरे ब्रह्माण्ड में हैं।

पंडित बीरबल की चतुराई से बहुत प्रभावित हुआ लेकिन अभी तक वह संतुष्ट नहीं था। इसलिए उसने प्रश्नों को और कठिन करने का निश्चय किया।
पंडित ने कुछ समय तक सोचा और पूछा - दुनिया में सबसे निशचिंत कौन होता है?
उत्तर मिला - एक शिशु , उसे कोई चिंता नहीं होती वा हमेशा अपनी बाल लीलाओं में लीन रहता है उसे ना रोटी की चिंता है
ना घर की वह एक वैरागी सन्यासी से भी अधिक निश्चिन्त होता है।

पंडित समझ चुका था कि बीरबल हो हरा पाना मुश्किल है इसलिए उसने कहा कि आज के लिए इतना ही कुछ प्रश्न कल किए जाएंगे।

अकबर खुश था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबार में था।

 अगले दिन फिर दरबार लगा और फिर पंडित उपस्थित हुए अब उसने सोच रखा था कि आज वह बीरबल को हरा ही देगा इसलिए उसने केवल एक ही प्रश्न सोच रखा था और उसे यकीन था कि बीरबल उसका उत्तर नहीं दे सकेगा।
उसने अकबर को यह प्रश्न पहले ही बता दिया था इसलिए
उसने बादशाह हो यह प्रश्न पूछने को कहा ।

अकबर ने पूछा बीरबल यह प्रश्न सिर्फ तुम्हारे लिए ही है ।
बताओ कि हमारे राज्य में देख सकने वाले ज्यादा हैं या ना देख सकने वाले ।

यह प्रश्न सुनकर सभी दरबारी हंसने लगे और बोले यह तो बहुत आसान है निश्चित रूप से देख सकने वाले लोग अधिक होंगे,क्योंकि अंधे तो कुछ ही ही सकते हैं।

बीरबल ने कुछ देर सोचा और बोला महाराज मुझे एक बिन बना चारपाई और दो आदमी दे दो।

अकबर ने ऐसा ही किया बीरबल ने कहा बादशाह मैं दिन तक उत्तर लेकर आपके सामने आ जाऊंगा।

बीरबल शहर के ठीक बीच में एक चौराहे पर मुख्य रास्ते के किनारे बैठ गए और वहां पर उस चारपाई को बुनने लगे और साथ में बैठे दोनों आदमियों को कहा कि जो कोई भी यहां आए और प्रश्न करे उसका नाम लिख लें।

वहां पर कुछ ही समय में बहुत भीड़ हो गई और हर आदमी यही पूछ रहा था कि बीरबल यह आप क्या कर रहे हैं?

दोपहर तक वहां पर कई लोग आए और प्रश्न करके चले गए बीरबल ने किसी का उत्तर नहीं दिया लेकिन सबका नाम जरूर लिखवा लिया।

दोपहर से शाम होने वाली थी लेकिन बीरबल का कोई पता नहीं था तो अकबर खुद वहां चले गए और जाते ही उन्होंने पूछा - बीरबल यह तुम क्या कर रहे हो?

बीरबल ने उन दिनों आदमियों से कहा कि इस सूची में जहापनाह का नाम भी जोड़ दो।

अब बीरबल ने वह सूची ली और उस पर ऊपर से लिख दिया ना देख सकने वाले लोग।

अकबर को जब यह पर चला कि बीरबल ने ऐसा किया है तो उसे आश्चर्य हुआ उसने बीरबल से कहा यह क्या पहेली है
बीरबल बोले महाराज ! पण्डित जी ने कहा था कि देख सकने और ना देख सकने वालों का पता लगाना है ना कि अंधो का।

यहां पर जितने भी लोग आए सभी देख पा रहे थे कि मैं चारपाई बुन रहा हूं लेकिन हर  आदमी ने मुझसे यही पूछा कि मैं क्या कर रहा हूं।

पंडित भी वहां उपस्थित था अत: उसने अब हार मान ली और बीरबल को विजयी घोषित करके उसे प्रणाम किया और चला गया।

अकबर एक बार फिर से बीरबल की चतुराई पर प्रसन्न थे इसलिए उन्होंने बीरबल को बधाई दी और उन्हें उपहार भी दिए।

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