शेखर और बिनोद की कहानी Hindi Moral story


Hindi Moral Story
शेखर और बिनोद की कहानी Hindi Moral Story


नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का kahanistation पर और आज हम आपके लिए लेकर आए हैं दो दोस्तों की कहानी जो जिंदगी के सफ़र में अपने मुकाम तक पहुंचने के लिए अलग अलग रास्तों को चुनते हैं। 

ये कहानी है दो उन दोस्तों की, जो एक माध्यम वर्गीय परिवार यानी मिडिल क्लास फैमिली से वास्ता रखते है। दोनों को अपने अपने परिवार की  आर्थिक स्थिति का  अनुमान भली-भांति है।


 कहानी  उन दो दोस्तों की है ,जिनमें से एक का नाम शेखर वह दूसरे का नाम बिनोद है। दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त हैं। दोनों का स्कूल जाना खाना पीना लगभग साथ में ही होता था।



 दोनों में से शेखर समझदार व बिनोद कुछ चंचल था।शेखर हर बात को समझदारी से तथा बिनोद हर बात को लगभग मजाक में ही लेता था। फिर भी दोनों घनिष्ठ मित्र थे। वे हमेशा एक दूसरे के हित में ही सोचते थे और एक दूसरे का खयाल रखते थे।


 दोनों को घर से जेब खर्च के रूप में मात्र कुछ ही रुपए मिलते थे, जिसका उपयोग शेखर अपनी आवश्यकता के लिए उन पैसों को बचा कर रखता जबकि बिनोद अपनी छोटी मोटी मौज-मस्ती में उड़ा देता था।

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 जब भी किशोर फालतू खर्च करता तो शेखर उसे समझाता था कि हम किसी अमीर घर से नहीं हैं और हमारे माता - पिता अधिक समृद्ध नहीं हैं जो हम पैसे ऐसे ही उड़ा दें तो जवाब में बिनोद कहता था कि यह तो छोटी मोटी रकम है,मुझे तो एक दिन बहुत बड़ा आदमी बन जाना है और फिर मेरे पास बहुत पैसे हो जाएंगे।

  शेखर उसे हमेशा कहता था कि अमीर बनना है तो उसके लिए हमें आज से ही मेहनत करनी होगी।


 जवाब में बिनोद कहता कि मुझे तो बस कुछ ही चंद समय में अमीर बन जाना है और तू भी मेरे साथ अमीर बन सकता है।

 धीरे-धीरे समय बीतता गया और दोनों के स्कूल की पढ़ाई भी खत्म हो गई थी आगे की पढ़ाई के लिए दोनों को शहर जाना था।दोनों के परिवार में भी अच्छे रिश्ते थे तो दोनों एक साथ रहने लगे लगे। 

कॉलेज की पढ़ाई में शेखर का कुछ अच्छा मन लगता ,वही बिनोद सोचता कि पढ़ाई ना करूं कुछ और करूं जिससे वह कुछ ही समय में अमीर बन सके। 


अब शेखर की बात का बिनोद पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था।बिनोद के मन में बस अमीर बनने का ख्याल ही चलता रहता था।

और अब तो अमीर बनने के लिए कुछ भी कर सकता था। एक दिन जब दोनों बस से कहीं जा रहे थे तो बिनोद को किसी का पर्स (बटुआ) गिरा हुआ मिल गया।


बिनोद के मन में लालच आ गया और उसने किसी को भी नहीं बताया कि उसे पर्स (बटुआ) मिला है। यहां तक कि उसने अपने घनिष्ठ मित्र शेखर को भी यह बात नहीं बताई। उससे भी यह बात छुपा कर रखी। 


जब घर जाकर बिनोद ने अकेले में बटुए को खोला तो उसे एक बड़ी रकम मिली जो उसने आज तक शायद ही कभी  देखी थी। धीरे धीरे बिनोद ने यह सोचा कि अब वह  हमेशा बस का सफर ही करेगा ताकि उसे ऐसे बटुए गिरे हुए मिलते रहे।


शेखर भी अपनी पढ़ाई में लग चुका था।और उसने ठान लिया था, कि वह भी कुछ भला अफसर ही बनेगा। वहीं दूसरी ओर बिनोद को भी समझाता था कि भाई तू भी पढ़ हमें अपने परिवार को अच्छा पालन देना है आखिर परिवार की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर आने वाली है।


लेकिन बिनोद को अब पढ़ाई में कोई भी रुचि नहीं थी।उसके सर पर बस अमीर बनने का भूत सवार था। बिनोद ने भी सोच लिया था कि वह अब कुछ नौकरी करेगा। पढ़ाई वैसे भी उससे अब होती नहीं।

तो बिनोद अब नौकरी ढूंढने चला।लेकिन उसकी उम्र के अनुसार उसे कोई भी नौकरी नहीं मिली फिर बड़ी मुश्किल से उसे एक बस में कंडक्टर की नौकरी मिली।


अब वह सोचता था कि हर महीने उसके पास भी कुछ पैसे होंगे जिससे वह धीरे धीरे तो अमीर बनने के रास्ते पर आ चुका होगा। लेकिन पढ़ाई छोड़ने के साथ-साथ बिनोद की समझदारी भी छूटती जा रही थी।इसलिए अब वह शेखर की कोई भी बात समझता ही नहीं था।

बिनोद को काम करते करते चार साल हो चुके थे और अब तक शेख़र अपनी पढ़ाई पूरी कर एक अच्छी सी सरकारी नौकरी पर लग चुका था।जहां उसे अफसर का पद प्राप्त था।


लेकिन बिनोद अभी भी कंडक्टर का काम ही कर रहा था।जिससे वह अब ऊब चुका था। उसे लगा कि उसे भी पढ़ाई करनी चाहिए थी लेकिन अमीर बनने का भूत सवार उसके सर पर अभी भी था। 


तो  एक दिन बिनोद की नजर किसी यात्री के बटुए पर पड़ी, जो अच्छा खासा मोटा दिख रहा था। तो बिनोद ने सोचा क्यों न मैं एक हाथ मार ही लूं तो बिनोद ने वह पर्स (बटुआ) चोरी कर दिया। बिनोद को उस आदमी के पर्स से आठ हजार रुपए मिल गए। वह खुश था।अब वह आए दिन यात्रियों का बटुआ चोरी करने लगा लेकिन वह मिलने वाले पैसे को जल्द ही खर्च कर देता था वह अब शराब भी पीने लगा था जिसमें वह चोरी का सारा रुपया लगा देता था।


 वह फिर भी यही सोचता रहा कि किसी दिन जब मोटी रकम हाथ लगेगी तो वह उसे नहीं खर्चेगा। वहीं दूसरी ओर शेखर अपने काम में इतना सफल हो चुका कि उसको तीन बार प्रोमोशन मिल गया था।


अब बिनोद और शेखर का मिलना भी कभी-कभी होता था।वह भी अब अपने कार्यालय के काम में व्यस्त ही रहता था।

 
एक दिन बिनोद के मन में विचार आया कि छोटी-छोटी चोरी कर वह अमीर तो बन नहीं सकता। क्यों ना कहीं एक बड़ा हाथ मारा जाए। 


इसके लिए बिनोद ने एक अमीर जमीदार का घर तय किया।
 वह अब उस घर में चोरी करेगा और रातों-रात अमीर बन जाएगा। फिर बिनोद ने ऐसी योजना बनाई कि वह रात को जमीदार के घर जाकर सारा पैसा और सोना चुरा लेगा तथा अमीर बन जाएगा। 

जैसे रात हुई बिनोद जमीदार के घर पहुंच गया चोरी के मकसद से। जब वो चोरी करने के बाद  अंतिम में भागने की तैयारी करने लगा तो बिनोद को चौकीदार ने पकड़ लिया। तथा पुलिस के हवाले कर दिया अब बिनोद का जेल  से निकलना मुश्किल ही था।

 फिर जैसे तैसे शेखर के कानो खबर लगी कि उसका बचपन का दोस्त चोरी के गुनाह में जेल में है, तो उसने सोचा कि अब अपने दोस्त को जेल से बाहर तो निकालना ही पड़ेगा आखिर दोस्त है वो मेरा।


तो उसने अपने दोस्त की जमानत करवाई । जब दोनों जेल से आ रहे थे तो बिनोद बहुत शर्मिंदा था।बिनोद शेखर से माफी मांगने लगा। 


फिर शेखर ने बिनोद को समझाया कि देख भाई मैं तुझे बचपन से समझाता आया हूं कि सफलता धीरे-धीरे मेहनत करने से मिलती है।कुछ ही समय में कोई भी सफल नहीं होता।सफलता के लिए कड़ी मेहनत करना जरूरी है। 

अब जब बिनोद को यह बात समझ आई तो उसने अपने दोस्त से वादा किया कि वह भविष्य में कभी भी चोरी नहीं करेगा और अब कुछ अच्छा काम करके मेहनत करेगा और सफल बनेगा।


शिक्षा:   कहानी से हमे यह सीख मिलती है,कि यदि हमें सफल होना है तो हमे उस सफलता को पाने के लिए हमको मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि सफलता वह मंजिल है जिसका रास्ता केवल मेहनत से हो कर जाता है।
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2 Comments

  1. Shekhar Aur Binod ??
    Phir se पिंकू कुमार ji ke saath anyaay
    #JusticeForपिंकू-कुमार
    Joke Bhaiya... Really Nice Story,,,

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