Dr. Rahat Indori Biography In Hindi

राहत इंदौरी की जीवनी

"बुलाती है मगर जाने का नहीं " यह पंक्ति इतनी प्रसिद्ध हुई कि फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड करने लगी ।यह पंक्ति जिनके मस्तिष्क की रचना थी वह थे डॉ राहत इंदौरी साहब। राहत इंदौरी एक भारतीय बॉलीवुड गीतकार और उर्दू कवि थे। वह उर्दू भाषा के पूर्व प्रोफेसर और चित्रकार भी थे। इसके पहले वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में उर्दू साहित्य के अध्येता(शोध छात्र) थे।

डॉ. राहत इंदौरी का जीवन परिचय



संक्षिप्त जीवन

  जन्म - 1 जनवरी 1950
  बचपन का नाम - राहत कुरैशी
  पिता का नाम - रफतुल्लाह कुरैैशी
  माता का नाम - मकबूल उन निसा बेगम
  शिक्षा- बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में एमए तथा उर्दू में पी एच डी
  निधन - 11 अगस्त 2020

डॉ राहत इंदौरी के प्रसिद्ध गीत:-

राहत कुरैशी, जिसे बाद में राहत इंदौरी के नाम से जाना जाता है, का जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में रफतुल्लाह कुरैैशी और उनकी पत्नी मकबूल उन निसा बेगम के घर हुआ था।
राहत साहब अपने माता पिता की चौथी संतान थे। इंदौरी जी ने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से की और वहीं से उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा भी पूरी की।
उन्होंने 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज, से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में एमए किया और स्वर्ण पदक जीता।
भोपाल, मध्य प्रदेश 1975 में राहत को मध्यप्रदेश के भोज विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी करने के लिए 1985 में उर्दू मुख्य मुशायरा नामक उनकी प्रसंग, निबन्ध के लिए सम्मानित किया गया।

डॉ राहत इंदौरी का व्यावसायिक जीवन

इंदौरी ने पिछले 40 - 45 वर्षों से मुशायरा और कवि सम्मेलन में प्रस्तुति दी। उन्होंने कविता पाठ करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से यात्रा की है।

उन्होंने भारत के लगभग सभी जिलों में काव्य संगोष्ठियों में भाग लिया है और विश्व स्तर पर भी कई बार अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मॉरीशस, केएसए, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि की यात्रा भी की है।

दो बार द कपिल शर्मा शो में इंदौरी साहब को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। सबसे पहले, 1 जुलाई 2017 को कुमार विश्वास और शबीनाजी के साथ सीजन 1 का एपिसोड; और दूसरी बार अशोक चक्रधर के साथ 21 जुलाई 2019के सीज़न 2 के एपिसोड में में भी इंदौरी को आमंत्रित किया।

इसके अतिरिक्त उन्हें वाह वाह क्या बात है! जिसके मेजबान शैलेश लोढ़ा जी थे, पर भी आमंत्रित किया गया।

राहत इंदौरी जी के प्रसिद्ध शायरी

"बुलाती है मगर जाने का नहीं"

उनकी कविता बुलती है मगर जाने नहीं इतनी प्रसिद्ध हो गई कि 2020 वैलेंटाइन्स सप्ताह के दौरान फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करने लगी। लोगों ने इस वाक्यांश को मीम(meme) के रूप में उपयोग करना शुरू कर दिया और राहत साहब ने फिर युवाओं के दिलों पर राज किया।

"किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोडी है"

राहत साहब की एक और सबसे लोकप्रिय पंक्ति "किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है" भी सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा वायरल हुआ।

राहत साहब ने अपनी रचना में लिखा है -

आगर खिलाफ है, होने दी, जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है आसमन थोड़ी है;

लगेगी आग से आयेंगे घर की ज़द मुझे
यहान पे सिरफ हमरा माकान थोड़ी है;

मै जानता हु दुशमन भी कम नहीं
लेकिन हमरी तराह हथेली पे जान थोडी है;

हमरे मुहां से जो निकले वही सदाकत है
हमरे मुहँ मे तुमहारी जुबान थोडी है;

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं हैं
किरयेदार है ज़ति माकान थोडी है;

सभी का खून शामिल यहाँ मिट्टी में
केसी के बाप का हिन्दुस्तान थोडी है।

राहत इंदौरी की पुस्तकें

2016 में, दिल्ली के कनॉट प्लेस के ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में राहत इंदौरी 'मेरे बाद' पर एक किताब जारी की गई थी। यह पुस्तक श्री इंदौरी की ग़ज़लों और शायरी का संकलन है।

मृत्यु: उनका 10 अगस्त 2020 को कोविड 19( के लिए सकारात्मक परीक्षण प्राप्त हुआ था और उन्हें मध्य प्रदेश के इंदौर में श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया था। 11 अगस्त 2020को उनका निधन हो गया, उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ था।

❤भले ही राहत इंदौरी साहब ने इस दुनिया से विदा ले ली हो किन्तु उनके द्वारा रचित गीत ,कविता,शायरी हम सबके दिल मे हमेशा उनके रूप में जिंदा रहेगी।❤

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