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Albert Einstein Biography In Hindi

आधुनिक विज्ञान की प्रगति में सबसे बड़ा नाम है अल्बर्ट आइंस्टीन का। न्यूटन और आइंस्टाइन दो ऐसे वैज्ञानिक नाम हैं जिन्हें विश्व का हर एक व्यक्ति जानता है।

कहा जाता है कि अल्बर्ट आइंस्टीन के समान बुद्धिमान कोई नहीं हुआ। आधुनिक समय के सभी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को अपना आदर्श ( ideal ) मानते हैं।

अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा कि द्रव्यमान (mass) और ऊर्जा (energy) सापेक्ष हैं और उसी तथ्य को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने अपना समीकरण E = mc^2 दिया।
आज हम इसी वैज्ञानिक के बारे में चर्चा करेंगे।


Albert Einstein Biography In Hindi

Albert Einstein childhood and schooling in Hindi

अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च , सन् 1897 में उल्म , जर्मनी में हुआ। इनके पिता हेर्मन्न आइंस्टीन थे , और इनकी माता का नाम पौलिन कोच था। अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म एक यहूदी परिवार में हुआ था।

उनके पिता अलग अलग कार्य करते थे , वे एक इंजीनियर , सेल्समैन और व्यवसायी भी थे।
उनकी माता एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखती थीं।

जब आइंस्टीन का जन्म हुआ तो उनका सर एक सामान्य बच्चे की तरह बिल्कुल नहीं था , उनका सर एक साधारण बच्चे से बड़ा था। आइंस्टीन की माता उसे एक चमत्कारी और निराला बच्चा मानती थी। 

आइंस्टीन की माता को पियानो बजाने का शौक था वह आइंस्टीन को भी music सिखाना चाहती थी , उनका मानना था कि संगीत एक ऐसी चीज है जो इंसान को अच्छा महसूस करा सकती है और कठिन परिस्थिति में संगीत इंसान को तनाव से मुक्त रख सकता है।

आइंस्टीन के चाचा उनके साथ रहा करते थे , और यह कहा जा सकता है कि विश्व को एक महान वैज्ञानिक देने के लिए उनके चाचा ही जिम्मेदार हैं। असल में उनके चाचा ने ही सबसे पहले उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना था। वे जो भी खिलौने आइंस्टाइन के लिए लेकर आते थे उनमें लगे वैज्ञानिक यंत्र आइंस्टाइन को अपनी ओर आकर्षित करते थे।

आइंस्टीन एक साधारण बच्चे की तरह बिल्कुल भी नहीं था। उसे अन्य बच्चों के साथ खेलना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। उसके सबसे अच्छे मित्र उसके चाचा ही थे, जो उसे खिलौने दिया करते थे। उसके चाचा भी गणित और भौतिकी के अच्छे ज्ञाता और एक इंजिनियर थे। वह अल्बर्ट को भी एक इंजिनियर के रूप में देखते थे।

1881 में उनकी एक छोटी बहन ने जन्म लिया जिसका नाम maja einstein रखा गया।आइंस्टीन को उसके साथ ही खेलना पसंद था वह अपने साथ के बच्चों से दूर ही रहना पसंद करते थे । 

एक बार जब अल्बर्ट ने अपनी बहन माजा को crawling ( हाथ और पैरों के बल चलना ) करते हुए देखा तो उन्होंने कहा कि यह कैसा खिलौना है जिस पर पहिए नहीं हैं।

अल्बर्ट आइंस्टीन की शिक्षा ( Albert Einstein Education In Hindi)

7 वर्ष की उम्र में अल्बर्ट आइंस्टीन ने म्यूनिख में 
अपनी स्कूली शिक्षा शुरू की। स्कूल का सफर कुछ खास नहीं रहा क्योंकि आइंस्टीन को स्कूल में एक मंदबुद्धि और कम अक्ल का बच्चा समझा जाता था। वह हमेशा ऐसे सवाल किया करते थे जिनके जवाब टीचर के पास नहीं होते और किताबों में लिखा हुआ उन्हें पसंद नहीं था। उनकी रुचि केवल विज्ञान और गणित में ही थी।

अल्बर्ट का घर उसके स्कूल से अधिक शिक्षाप्रद साबित हुआ ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बात वह यहूदी परिवार से आते थे और यहूदियों को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

स्कूल में भी यहूदियों की संख्या कम होने के कारण उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता था , जिस वजह से आइंस्टीन स्कूल को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे।

आइंस्टीन बहुत जिज्ञासु थे , बहुत छोटी उम्र से ही वह बड़े बड़े सवालों के उत्तर जानना चाहते थे। ब्रह्माण्ड के बारे में उनकी जिज्ञासा उन्हें टीचर के पास ले जाती थी लेकिन उस समय तक विज्ञान की तरक्की ना होने के कारण टीचर के पास उसके सवालों का उत्तर नहीं होता था।

आइंस्टीन के केवल गणित और विज्ञान में अच्छे नम्बर आते थे, बाकी विषयों में उनकी कोई रुचि नहीं थी, इस कारण अन्य विषयों के टीचर उसे एक बिगड़ा हुआ और बेवकूफ बच्चा समझते थे। उन्हें लगता था कि आइंस्टीन सिर्फ क्लास से ध्यान भटकाने के लिए अपने सवाल लेकर आता है।

आइंस्टीन को अलजेब्रा के विषय में अपने चाचा से बहुत कुछ पढ़ने और सीखने को मिला।

12 वर्ष की उम्र में आइंस्टीन ने अलजेब्रा में महारथ हासिल कर ली और 14 वर्ष की उम्र में calculus में कूद पड़े और बहुत जल्द इंटीग्रल 
कैलकुलस सीखने में जुट गए। यह सब उन्हें उनके चाचा की मदद से ही सीखने को मिला।

उनके चाचा ने उन्हें गणित में बहुत कुछ सिखाया और ज्योमेट्री में उनको बहुत कुछ पढ़ा दिया। 

कहा जाता है कि एक बार history के अध्यापक ने प्रशिया और फ्रांस के युद्ध से संबंधित एक बहुत सामान्य सा सवाल पूछा ,
आइंस्टीन ने जवाब दिया सर मुझे नहीं पता।
टीचर ने कहा - तुम्हें क्यों नहीं पता ? मैंने तुम्हे कई बार बताया है?"

आइंस्टीन ने जवाब दिया, " शायद मैं भूल गया हूंगा ।"

टीचर बोले - "क्या तुमने याद करने की कोशिश भी नहीं की ?"

आइंस्टीन ने ना में सर हिलाया।

टीचर ने कारण पूछा तो आइंस्टीन ने जवाब दिया कि उन्हें तारीख को याद करने में कोई दिलचस्पी नहीं।

टीचर ने फिर कारण पूछा तब आइंस्टीन ने कहा कि तारीख तो किसी भी किताब में मिल जाएंगी।

टीचर थोड़े देर के लिए स्तब्ध हो गए।

कुछ समय बाद टीचर बोले, "तो क्या तुम शिक्षा में विश्वास नहीं रखते हो?"

आइंस्टीन ने कहा , "सर मैं शिक्षा में विश्वास रखता हूं लेकिन मुझे नहीं लगता कि तथ्यों को याद करना ही शिक्षा है!"

यह किस्सा आइंस्टीन के लिए अच्छा नहीं रहा उन्हें टीचर की डांट खानी पड़ी और क्लास के सामने शर्मिंदा होना पड़ा।

आइंस्टीन अपने स्कूल को पसंद नहीं करते थे और चाहते थे कि उन्हें इस स्थान से दूर के जाया जाए।

आइंस्टीन के पिता के पास उनके पढ़ाई के लिए अधिक पैसे नहीं थे इसलिए आइंस्टीन को एक अप्रिय वातावरण में रहना पड़ता था।

म्यूनिख में जहां वह रहते थे उस घर के मकानमालिक का व्यवहार बहुत बुरा था, वहां बहुत शोर होता था और वह बस्ती भी बहुत गंदी थी।

आइंस्टीन को वायलिन बजाने का शौक था लेकिन उसकी मकान मालकिन उसे इसकी इजाजत नहीं देती थी, और यह चीज आइंस्टीन को और बुरी लगती थी।

आइंस्टीन जल्द से जल्द अपना डिप्लोमा पूरा करना चाहते थे लेकिन उन्हें खुद से उम्मीद नहीं थी। उन्होंने यह बात अपने मित्र युरी और कजिन एल्सा को भी बताई, और उन्होंने आइंस्टीन की हिम्मत बढ़ाई कि वे इसे कर सकते हैं।

आइंस्टीन को विज्ञान की किताबें पढ़ना पसंद था जोकि उन्हें स्कूल में मुश्किल से पढ़ाई जाती थी। उस दौरान विज्ञान के नाम पर उनके पास एक जियोलॉजी ( भूगर्भशास्त्र ) की ही किताब थी।

आइंस्टीन को बस उस जगह से बाहर निकलना था।कई बार उनके मन में विचार आया कि वे वापस मिलान अपने माता पिता के पास वापस चले जाएं लेकिन उन्हें डर भी था कि उनके पिता उनको वापस म्यूनिख भेज देंगे। 

अपने स्कूल को पूरा करने के लिए भी आइंस्टीन को एक शरारत सूझी ।उन्होंने अपने मित्र युरी और एक अन्य डॉक्टर वेल्स से नकली मेडिकल रिपोर्ट निकलवाने की सोची , ताकि वह स्कूल से कुछ समय का ब्रेक ले सकें।

डॉक्टर वेल्स भी उनकी मदद के लिए तैयार हो गया ,और उसने आइंस्टीन से कहा कि मैं तुम्हें
एक नकली certificate दे दूंगा जिसमें यह लिखा होगा कि अल्बर्ट आइंस्टीन को मानसिक तनाव है जिस कारण वह स्कूल जाने की स्थिति में नहीं है।

आइंस्टीन और डॉक्टर वेल्स मित्र बन चुके थे इसलिए जब डॉक्टर ने पूछा अब तुम क्या करोगे तो आइंस्टीन ने जवाब दिया कि अब वह अपने माता पिता के पास वापस मिलान जाएंगे और वहीं के किसी अच्छे इंस्टीट्यूट (institute) में प्रवेश लेंगे।

स्कूल में आइंस्टीन ने वह certificate दिखाया, आइंस्टीन ने अब तक अपना स्कूल का डिप्लोमा पूरा नहीं किया था। इसलिए उन्होंने अपने मैथ्स टीचर से एक certificate लेना चाहा ताकि उसे किसी और जगह प्रवेश लेने में कठिनाई ना हो।

मैथ्स टीचर आइंस्टीन को पसंद करते थे ,इसलिए उन्होंने कहा कि क्या मैं इसमें ऐसा लिख दूं कि मैं अब तुम्हें नहीं पढ़ा सकता , तुम ही मुझे पढ़ाने लग जाओगे।

यकीनन यह वाक्य मैथ्स टीचर ने इसलिए कहा होगा क्योंकि आइंस्टीन गणित में बहुत अच्छे थे।

आइंस्टीन वापस मिलान चले गए और अपनी आगे की पढ़ाई करने लगे। उन्होंने स्विस स्कूल में प्रवेश लिया।

सन 1900 में आइंस्टीन ने ज़्यूरिख़ पॉलीटेक्निक से अपनी स्नातक ( ग्रेजुएशन) की पढ़ाई पूरी की।

 सितंबर 1901 में आइंस्टीन ने स्विट्जरलैंड के एक स्कूल में अध्यापक के रूप में कार्य करना शुरू किया। इसी दौरान वह अपनी रिसर्च में भी लगे हुए थे।
अल्बर्ट आइंस्टीन की खोज

बचपन से ही अल्बर्ट आइंस्टीन सूर्य के प्रकाश की किरणों को देखकर यह सोचा करते थे कि क्या मैं इनपर बैठकर जा सकता हूं और इन पर बैठकर यह संसार कैसा दिखाई देगा?


17 मार्च 1905 को क्वांटम थियोरी पर अपनी रिसर्च पूरी की और रिसर्च पेपर पूरा किया।

यह वही दौर था जब अन्य वैज्ञानिक प्रकाश की गति को मापने पर रिसर्च कर रहे थे ।
अगले ही साल आइंस्टीन को ज्यूरिख यूनिवर्सिटी से पीएचडी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्राप्त हुई और आइंस्टीन द्वारा दिए गए रिसर्च पेपर को theory of relativity यानी सापेक्षता का सिद्धांत कहा गया।
 Theory Of Relativity 
सापेक्षता का सिद्धांत

सर आइजक न्यूटन ने गति को समझाते हुए बताया था कि कोई भी चीज (वस्तु ) गति ( motion ) या स्थिर अवस्था में तब तक रह सकती है जब तक उस पर कोई बल न लगे।
न्यूटन ने ही सबसे पहले दुनिया को गति को समझने का रास्ता दिखाया , लेकिन गति के कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें इससे नहीं समझा जा सकता है ।

मान लें कि आप किसी सड़क के किनारे खड़े हैं और उसे समय एक गाड़ी जाती है जिसमें कुछ लोग बैठे हुए हैं। 

अब आपके लिए वो सारे लोग भी गाड़ी के साथ गतिमान स्थिति में हैं लेकिन उस गाड़ी में बैठे किसी आदमी के लिए दूसरी सीट पर बैठा आदमी स्थिर है यानी वह कोई गति नहीं कर रहा।

अब यहां पर दोनों ही पक्ष सही हैं क्योंकि अब गति का निर्धारण इस तरीके से किया जाएगा कि गति का अनुमान स्थिर होकर किया जा रहा है अथवा गतिशील होकर।

इससे निष्कर्ष ( conclusion) यह निकलता है कि गति निरपेक्ष नहीं बल्कि सापेक्ष है ।

साथ ही साथ प्रकाश एक ऐसी भौतिक राशि है जिसकी गति का मान समान रहता है , फिर चाहे उसे गतिमान गड़ी से देखा जाए या स्थिर होकर ।

आइंस्टीन ने प्रकाश ऊर्जा समीकरण E = mc^2 दिया।

आइंस्टीन ने प्रकाश के द्वैती प्रकृति ( dual nature) के बारे में भी बताया जिसके अनुसार प्रकाश 

अल्बर्ट आइंस्टीन का वैवाहिक जीवन
आइंस्टीन ने 1903 में मिलेवा मरिक से शादी की , उनकी एक बेटी थी जो कि बहुत छोटी अवस्था में चल बसी। बाद में उनके दो बेटे हुए जिनका नाम हैंस अल्बर्ट और एडुआर्ड था। 1914 में आइंस्टीन मीलेवा से अलग हो गए जिसकी कारण आइंस्टीन की कजिन एल्सा थी।
1919 में आइंस्टीन और मिलेवा का कुछ कारणों से तलाक हो गया ।

उसी वर्ष (1919 ई) में अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी कजिन एल्सा से विवाह कर लिया।
एल्सा की पहली शादी से तीन बच्चे थे जिनमें दो बेटियां एल्से और मार्गोट , और एक बेटा भी था जिसकी मृत्यु बहुत जल्दी ही गई थी।

एल्सा से विवाह के बाद उनका कोई और बच्चा नहीं था, उन्होंने एल्से और मार्गोट की जिम्मेदार उठाई।

बाद में उनकी यही पुत्री इल्से बहुत कम समय के लिए आइंस्टीन की सहायक भी रही।

इस दौरान आइंस्टीन अपने परिवार के साथ बर्लिन में रह रहे थे।

1933 के समय तक जर्मनी में हिटलर इतना ताकतवर हो चुका था कि यहूदियों का जर्मनी में रह पाना मुश्किल हो चुका था , और यहूदी होने के कारण अल्बर्ट को भी देश छोड़कर अमेरिका जाना पड़ा।

नजिवादियों ( हिटलर के समर्थकों) ने यहूदियों पर बहुत जुल्म करना शुरू किया , अल्बर्ट आइंस्टीन की फोटो को बहुत सारी जगहों पर जलाया गया। उस समय अल्बर्ट आइंस्टीन पर पांच हजार डॉलर का इनाम रखा गया और यह बताया गया कि यह वो इंसान है जिसे अब तक फांसी हो जानी चाहिए थी।

1933 में आइंस्टीन और एल्सा न्यू जर्सी , यू.एस.ए. चले गए उसी वर्ष एल्सा की तबीयत में गड़बड़ी शुरू हो गई और आइंस्टीन को अपनी रिसर्च के साथ साथ एल्सा का भी ध्यान रखना था। 

1936 में एल्सा की लंबी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई।

आइंस्टीन ने अपनी रिसर्च को करना जारी रखा। उन्होंने अपने वैज्ञानिक कार्यकाल में लगभग 300 से भी अधिक शोध पत्र ( रिसर्च पेपर) जारी किए।

आइंस्टीन को संगीत , नाव चलना , ट्रेकिंग और अलग अलग जगहों पर घूमने का शौक भी था , इसलिए उन्होंने कई देशों की यात्रा की।

प्रमुख रूप से आइंस्टीन ने इजिप्ट , श्री लंका , चाइना, सिंगापुर, जापान आदि देशों में भ्रमण किया और उनके बारे में जानने की कोशिश की।


अल्बर्ट आइंस्टीन की मृत्यु

अप्रैल 1955 में अल्बर्ट के पेट में कुछ दर्द होने लगा , डॉक्टर के अनुसार उनकी धमनियों में कुछ दिक्कत थी। डॉक्टर ने सर्जरी के लिए जब आइंस्टीन को कहा तो उनका जवाब था कि,
"मैं जब मरना चाहूं तब मर सकता हूं और सर्जरी की मदद से अपनी जिंदगी को बढ़ाना अच्छा नहीं है। मैंने जीवन में जो कुछ करना था वो मैं कर चुका हूं अब जाने का समय हो चुका है और मैं शान से जाना चाहूंगा।"
Albert Einstein Biography In Hindi


18 अप्रैल 1955 को धरती ने एक महान वैज्ञानिक को खो दिया। Penn Medicine Princeton Medical Center, न्यू जर्सी, यू एस में 76 वर्ष की उम्र में आइंस्टीन का निधन हो गया।

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