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कपिल देव की जीवनी (Kapil Dev Biography In Hindi)


कपिल देव का जीवन परिचय :

नाम :कपिल देव;
पिता : राम लाल निखंज;
माता : राकुमारी लाजवंती ;
भाई - बहन : 2 भाई और 3 बहनें ;
व्यवसाय : क्रिकेटर ;
पत्नी : रोमी भाटिया ;
पुत्री : अमिया देव ;

कपिल देव की जीवनी Kapil Dev Biography In Hindi


कपिल देव का आरंभिक जीवन :

कपिल देव का जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़,पंजाब में हुआ था। उनके पिता का नाम रामलाल निकुंज और माता का नाम राजकुमारी था। कपिल देव के पिता लकड़ियों के व्यापारी थे।

भारत पाकिस्तान बंटवारे से पहले कपिल देव का परिवार पाकिस्तान में रहता था लेकिन भारत - पाक विभाजन के बाद वे भारत में आ गए। कपिल देव के 2 भाई और 3 बहनें हैं।

क्रिकेट को कपिल देव बचपन से ही बहुत पसंद करते थे और खेलने में भी बचपन से ही बहुत प्रतिभावान थे।कपिल देव तेज गेंदबाज बनना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने अपने कंधों को मजबूत करना था , अतः वे बचपन से ही लकड़ी काटा करते थे जिससे कि उनके कंधे  मजबूत रहें।

कपिल देव ने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई DAV स्कूल से की; स्कूल में भी वे काफी अच्छे स्पोर्ट्स मैन थे। बाद में उनके पिता ने कपिल देव का दाखिला सेंट एडवर्ड कॉलेज में करा लिया और वहां पर भी उन्होंने अपने खेल से सभी को प्रभावित किया।

कपिल की क्रिकेट में इतनी लगन और प्रतिभा को देखते हुए उनके परिवार वालों ने कपिल देव को  प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिलाने का निर्णय लिया।

भूतपूर्व क्रिकेटर देशप्रेम आजाद ने कपिल देव कोच के रूप में उनके खेल को और अधिक निखारने में काफी मदद की।

कपिल देव के क्रिकेट करियर की शुरुआत: 

रणजी ट्रॉफी :

नवम्बर 1975 में , कपिल देव के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए ,उन्हें हरियाणा की रणजी टीम से खेलने का अवसर प्राप्त हुआ। पहले मैच में ही कपिल देव ने 6 विकेट हासिल कर लिए।

अपने पहले रणजी ट्रॉफी सीजन में कपिल देव ने कुल 30 मैच खेले जिसमें उन्होंने कुल 121 विकेट्स लिए।

1976 के रणजी ट्रॉफी सीजन में कपिल देव ने एक अहम मैच में जम्मू कश्मीर के खिलाफ खेलते हुए हरियाणा की टीम के लिए 8 विकेट लेकर शानदार जीत अपने नाम की थी।

कपिल देव का अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर :

घरेलू क्रिकेट में अपने असाधारण प्रदर्शन दिखाने के कारण उन्हें भारत की अंतर्राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई।

16 अक्टूबर 1978 को कपिल देव ने अपने अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट कैरियर की शुरुआत पाकिस्तान के खिलाफ की। इस श्रृंखला में कपिल देव ने अपनी बॉलिंग और हिटिंग से सभी को प्रभावित किया, परंतु दुर्भाग्य से भारत यह टेस्ट सीरीज हार गया।

वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेलते हुए कपिल देव ने अपना पहला शतक लगाया। उस समय वेस्ट इंडीज की बॉलिंग दुनिया में सबसे खतरनाक मानी जाती थी।

कपिल देव अपने शुरुआती 25 मैचों में 100 विकेट्स और 1000 रन बनाने वाले प्रथम भारतीय क्रिकेटर बन गए थे।

1982 में कपिल देव को श्री लंका के खिलाफ भारत के मैच में कप्तानी करने का मौका दिया गया। उस समय टीम के कैप्टन सुनील गावस्कर थे लेकिन उस मैच में उन्हें रेस्ट दिया गया था।

कुछ समय बाद ही कपिल देव ही टीम के आधिकारिक रूप से कप्तान बना दिए गए और कप्तानी की डोर हाथ में आते ही उनके सामने 1983 के क्रिकेट विश्व कप की चुनौती आ गई।

1983 का विश्व कप :

1983 के विश्व कप टूर्नामेंट में भारतीय टीम को जीत का दावेदार नहीं माना जा रहा था, परंतु कपिल देव की कप्तानी में टीम ने काफी अच्छा प्रदर्शन दिखाया। ग्रुप स्टेज के अंतिम मैच में ऑस्ट्रेलिया को 118 रनों से हराया था।

सेमीफाइनल का मुकाबला होस्ट टीम इंग्लैंड के साथ था जिसमें भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से मात देकर फाइनल की राह पक्की कर दी।

विश्व कप फाइनल का मुकाबला 25 जून 1983 को इंग्लैंड के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में वेस्ट इंडीज की टीम के खिलाफ खेला जाना था। वेस्ट इंडीज की टीम 2 बार विश्व कप अपने नाम कर चुकी थी।

पहले गेंदबाजी करते हुए वेस्ट इंडीज ने भारत की शुरुआती बैटिंग लाइन अप को ध्वस्त करते हुए मात्र 17 रनों पर 5 विकेट चटका दिए।

जब कपिल देव बल्लेबाजी करने उतरे तो टीम का स्कोर 17 रन था, यहां से टीम को एक अच्छे स्कोर तक ले जाना आसान नहीं था, तब भी कपिल देव ने यह जिम्मेदारी निभाई। 

उस मैच में कपिल देव ने 138 गेंदों पर नाबाद 175 रन बनाए। इस पारी में उन्होंने कुल 6 छक्के और 16 चौके लगाए।

पहले बैटिंग करते हुए भारत ने 60 ओवरों में 8 विकेट्स खोकर 266 रन बनाए, और वेस्ट इंडीज की टीम को 235 पर ऑल आउट करके विश्व कप अपने नाम किया।

इस पूरे टूर्नामेंट में कपिल देव ने 303 रन बनाए  और बॉलिंग में 12 विकेट्स लिए।

कपिल देव का ODI करियर :

अपने पूरे अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में कपिल देव ने कुल 225 ODI (एकदिवीय मैच ) खेले जिनमें उन्होंने 23.79 की औसत से कुल 3783 रन बनाए। वहीं अपनी बॉलिंग से 253 विकेट्स भी हासिल किए।

कपिल देव का अंतराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट :

टेस्ट क्रिकेट में कपिल देव ने कुल 131 मैच में 31.1 की औसत से कुल 5248 रन बनाए , वहीं बॉलिंग में 434 विकेट्स लिए हैं।

कपिल देव का अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास :

1994 में, भारत के इस महान ऑलराउंडर क्रिकेटर ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया।

कपिल देव भारतीय टीम के कोच के रूप में :
कपिल देव ने अक्टूबर 1999 से अगस्त 2000 तक के छोटे अंतराल में भारतीय टीम के कोच के रूप में अहम भूमिका निभाई।

कपिल देव का निजी जीवन : (Personal Life )

कपिल देव का विवाह 1980 में रोमी भाटिया से हुआ, जो की एक बिजनेस वुमन हैं। उनकी एक बेटी अमिया देव हैं जिनका जन्म 1996 में हुआ।

 कपिल देव को प्राप्त पुरुस्कार और सम्मान :(Awards And Achivements)

  • 1980 में कपिल देव को क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरुस्कार खेल जगत में बहुत बड़ा पुरुस्कार माना जाता है।
  • 1982 में  भारत सरकार द्वारा कपिल देव को पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
  • 1983 में इन्हें 'विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर' से नवाजा गया।
  • 1991 में भारत सरकार द्वारा कपिल देव को क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2002 में, कपिल देव को विज्डन 'इंडियन प्लेयर ऑफ द सेंचुरी' के खिताब से नवाजा गया।
  • 2010 में कपिल देव को क्रिकेट हाल ऑफ फेम पुरुस्कार मिला।


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